रुपया 95/$ के पार, Brent $100 के करीब: तेल ने RBI की राहत कितनी जल्दी पलटी
रुपया बुधवार को 95 प्रति डॉलर के पार फिसला और 95.2250 तक गया। Middle East tension से Brent $100 के करीब पहुंचने ने भारत के import bill और inflation risk को फिर केंद्र में ला दिया है।

भारतीय रुपया 9 सितंबर को डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर के पार फिसल गया। Reuters के मुताबिक currency 95.2250 तक कमजोर हुई। पिछले सप्ताह RBI की लगातार intervention से रुपया 94.30 के आसपास मजबूत हुआ था, लेकिन crude oil में तेज उछाल ने यह राहत जल्दी पलट दी।
तेल इतना अहम क्यों है?
भारत दुनिया के सबसे बड़े crude oil importers में है। Brent अगर लंबे समय तक $100 के आसपास रहता है तो refiners और importers को ज्यादा डॉलर चाहिए होते हैं। इससे rupee पर दबाव बढ़ता है और imported inflation का risk भी बढ़ सकता है।
RBI क्या कर रहा है?
Reuters ने bankers के हवाले से लिखा है कि RBI ने मंगलवार और बुधवार को भी market में intervention की, लेकिन इस बार उसका असर पिछले सप्ताह जितना मजबूत नहीं दिखा। 95 का स्तर टूटने के बाद stop-loss selling ने गिरावट तेज की।
आम लोगों पर असर कैसे पहुंचता है?
कमजोर रुपया और महंगा crude सीधे petrol-diesel की retail कीमत बदलें, यह जरूरी नहीं। लेकिन लंबे समय तक दोनों साथ रहें तो transport cost, imported goods, corporate margins और inflation पर दबाव बढ़ सकता है। अगला बड़ा सवाल यह है कि Middle East supply risk कितना लंबा चलता है और RBI currency volatility को कितनी aggressively manage करता है।