दृष्टिकोण: RBI की संचार रणनीति अब बाजार के लिए मुद्दा क्यों बन रही है
तरलता और ब्याज दरों पर हालिया संकेत हमेशा एक दिशा में नहीं रहे, जिससे निवेशकों को नीति की मंशा समझने में ज्यादा अनुमान लगाना पड़ रहा है।

इस सप्ताह रॉयटर्स के विश्लेषण में RBI के कुछ नीतिगत संकेतों और बाद की कार्रवाइयों के बीच अंतर पर ध्यान दिया गया, जिसमें डॉलर डिपॉजिट सुविधा को समय से पहले बंद करना और नीति वक्तव्य व बैठक के मिनट्स के स्वर में अंतर शामिल है।
केंद्रीय बैंक का संचार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बाजार फैसले से पहले ही अपेक्षाओं को कीमतों में शामिल कर लेते हैं। यदि नीति की प्रतिक्रिया स्पष्ट न हो तो वास्तविक नीति में बड़ा बदलाव न होने के बावजूद अस्थिरता बढ़ सकती है। भारत में महंगाई, पूंजी प्रवाह और रुपये के बीच संतुलन के कारण स्पष्टता और जरूरी हो जाती है।