नई दिल्ली में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन समाप्त हो गया। समापन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति शृंखला में आने वाले झटके, जलवायु संकट और महत्वपूर्ण तकनीकों का हथियार की तरह उपयोग अब किसी एक क्षेत्र तक सीमित समस्या नहीं रहे हैं।
विस्तारित ब्रिक्स में अब 11 सदस्य देश और कई साझेदार देश शामिल हैं। यह समूह दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए इस बार चर्चा केवल राजनीतिक घोषणाओं तक सीमित नहीं रही। व्यापार, स्वास्थ्य, ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे विषय भी केंद्र में रहे।
संक्रामक रोगों के लिए पूर्व चेतावनी तंत्र
मोदी ने संक्रामक रोगों के लिए ब्रिक्स स्तर पर पूर्व चेतावनी तंत्र बनाने की घोषणा की। इसका उद्देश्य अलग-अलग देशों के बीच रोग निगरानी, सूचनाओं के आदान-प्रदान और आपात तैयारी को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
घोषणा में खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता में सहयोग, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सीमा-पार भुगतान प्रणालियों को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
सहमति बनना क्यों महत्वपूर्ण है
ब्रिक्स के भीतर ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, भारत, चीन और रूस जैसे देशों के रणनीतिक हित कई मुद्दों पर अलग-अलग हैं। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच संयुक्त घोषणा पर सहमति बनना इसलिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
सम्मेलन के अंत में भारत ने 2027 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता चीन को सौंप दी। अब निगाह इस पर होगी कि नई दिल्ली में तय किए गए प्रस्तावों में से कितने वास्तविक कार्यक्रमों और संस्थागत व्यवस्थाओं में बदलते हैं।