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ब्रिक्स की नई दिल्ली घोषणा: पश्चिम एशिया में संयम, एकतरफा शुल्क पर चिंता और स्थानीय मुद्रा में व्यापार का समर्थन

नई दिल्ली घोषणा में संघर्ष, प्रतिबंध, व्यापार बाधाओं, स्थानीय मुद्रा में लेन-देन और वैश्विक संस्थागत सुधार पर ब्रिक्स की साझा स्थिति दर्ज की गई।

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ब्रिक्स नेताओं ने नई दिल्ली घोषणा को अपनाते हुए पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई और सभी पक्षों से अधिकतम संयम, संवाद और कूटनीति की अपील की।

घोषणा का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि समूह में ईरान और खाड़ी क्षेत्र के कई देश शामिल हैं, जिनके सुरक्षा हित कई बार एक-दूसरे से अलग रहते हैं।

व्यापार और प्रतिबंधों पर साझा रुख

दस्तावेज में एकतरफा शुल्क और गैर-शुल्क उपायों पर चिंता जताई गई। ऐसे प्रतिबंधों का भी विरोध दोहराया गया जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की व्यवस्था से बाहर लगाए जाते हैं।

ब्रिक्स ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सीमा-पार भुगतान संपर्क बढ़ाने का समर्थन किया। इसका अर्थ किसी साझा ब्रिक्स मुद्रा की घोषणा नहीं है। फिलहाल जोर मौजूदा भुगतान प्रणालियों और निपटान व्यवस्थाओं को अधिक आसानी से जोड़ने पर है।

बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की मांग

घोषणा में संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक शासन संस्थाओं में सुधार की मांग दोहराई गई। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में प्रतिनिधित्व को वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप बदलने की वकालत करता रहा है।

संयुक्त घोषणा कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि नहीं है। इसका महत्व राजनीतिक सहमति में है, खासकर तब जब सदस्य देश कई रणनीतिक विवादों पर अलग-अलग पक्षों में खड़े हों।

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