होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों की संख्या सप्ताहांत में हाल के औसत से नीचे रही। रॉयटर्स के मुताबिक चार बाहर जाने वाले और दस भीतर आने वाले जहाजों को दर्ज किया गया, जबकि दस दिन का औसत लगभग 14 दैनिक आवाजाही का रहा था।
निगरानी के आंकड़े पूरी तस्वीर नहीं दिखाते, क्योंकि सुरक्षा खतरे के समय कुछ जहाज अपने एआईएस पहचान संकेतक बंद कर सकते हैं। फिर भी मौजूदा रुझान समुद्री परिवहन पर दबाव की ओर इशारा करता है।
होर्मुज इतना महत्वपूर्ण क्यों है
होर्मुज जलडमरूमध्य से लंबे समय से वैश्विक कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता रहा है। क्षेत्रीय संघर्ष, जहाजों पर हमले और आवाजाही की पाबंदियों ने इस मार्ग की विश्वसनीयता पर सवाल बढ़ाए हैं।
इसी अवधि में सऊदी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन पर हमला हुआ, जिससे वैकल्पिक निर्यात मार्ग भी अस्थायी रूप से कमजोर पड़ा।
मालभाड़े और बीमा की लागत
तेल का वास्तविक प्रवाह पूरी तरह बंद न हो, तब भी सुरक्षा जोखिम टैंकर किराया, युद्ध-जोखिम बीमा और ईंधन लागत बढ़ा सकता है। यह अतिरिक्त खर्च अंततः खरीदारों तक पहुंचता है।
भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए इसलिए केवल कच्चे तेल की कीमत नहीं, बल्कि समुद्री परिवहन की लागत भी महत्वपूर्ण है।