लालरेमसियामी हमरजोटे की हॉकी यात्रा मिजोरम के कोलासिब में मिट्टी के मैदानों पर नंगे पांव खेलने से शुरू हुई थी। आज वह भारतीय महिला हॉकी टीम की अनुभवी आक्रमणकारी खिलाड़ियों में हैं और आइची-नागोया एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक के लक्ष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
रॉयटर्स के मुताबिक लालरेमसियामी मिजोरम की पहली महिला ओलंपियन और एशियाई खेलों की पदक विजेता हैं।
तेजी से राष्ट्रीय टीम तक पहुंच
अंडर-18 टीम में पदार्पण के एक वर्ष के भीतर उन्हें वरिष्ठ राष्ट्रीय शिविर में बुला लिया गया। 2018 युवा ओलंपिक के रजत और 2018 एशियाई खेलों के फाइनल में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अब उनके पास 193 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों का अनुभव है और वह लगातार तीन विश्व कप में गोल करने वाली पहली भारतीय महिला बन चुकी हैं।
मिजोरम में ढांचा बनाने का सपना
लालरेमसियामी ने कहा कि मिजोरम में हॉकी मैदान और प्रशिक्षण ढांचा अभी सीमित है। उनका दीर्घकालीन सपना अपने राज्य में ऐसी सुविधाएं बनाना है, ताकि युवा लड़कियों को खेल जारी रखने के लिए दूर न जाना पड़े।
भारत पिछले विश्व कप में पांचवें स्थान पर रहा, जो 1974 के बाद उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। अब टीम 1982 के बाद पहली बार एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना चाहती है।




