दक्षिण-पश्चिम मानसून अब विदाई के दौर में प्रवेश कर चुका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार इसकी वापसी पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से शुरू हुई है। आम तौर पर मानसून की वापसी उत्तर-पश्चिम भारत से शुरू होती है और धीरे-धीरे देश के दूसरे हिस्सों की ओर बढ़ती है।
इस बार तस्वीर एक जैसी नहीं है। देश के कई हिस्सों में मौसमी बारिश सामान्य से कम रही है। इंडियन एक्सप्रेस ने IMD के आंकड़ों के आधार पर बताया कि 19 सितंबर तक भारत के करीब 43 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में बारिश की कमी दर्ज की गई थी और देशभर की कुल बारिश सामान्य से लगभग 15 प्रतिशत कम थी।
इसका मतलब यह नहीं है कि मानसून खत्म हो गया है। बंगाल की खाड़ी में बन रहा नया मौसम तंत्र ओडिशा, आंध्र प्रदेश और आसपास के राज्यों में फिर भारी बारिश करा सकता है। यही भारतीय मानसून की जटिलता है - एक हिस्से में वापसी शुरू हो सकती है, जबकि दूसरे हिस्से में उसी समय तेज बारिश जारी रह सकती है।
किसानों के लिए अब सबसे अहम सवाल केवल यह नहीं है कि कुल कितनी बारिश हुई, बल्कि यह भी है कि बारिश कब हुई और किन इलाकों में हुई। देर से होने वाली तेज बारिश खड़ी फसलों, कटाई और स्थानीय बाढ़ - तीनों पर असर डाल सकती है।

