National Stock Exchange यानी NSE का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा IPO अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। करीब 2.3 अरब डॉलर के इस सार्वजनिक निर्गम को दूसरे दिन ही पर्याप्त आवेदन मिल गए और यह पूरी तरह भर गया।
इस प्रस्ताव की एक जरूरी बात समझना महत्वपूर्ण है। यह पूरा IPO 'Offer for Sale' है। यानी NSE नए शेयर जारी करके अपने लिए पैसा नहीं जुटा रहा है। इसके बजाय मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बाजार में बेच रहे हैं।
शेयर का मूल्य दायरा 1,700 रुपये से 1,785 रुपये तय किया गया है। सूचीबद्ध होने की तारीख 24 सितंबर रखी गई है।
NSE की कमाई में derivatives कारोबार की बड़ी भूमिका रही है। हाल के नियामकीय बदलावों और बढ़ी लेनदेन लागत ने इस क्षेत्र की गतिविधियों को प्रभावित किया है। इसलिए निवेशकों के लिए सवाल केवल यह नहीं है कि NSE कितना बड़ा एक्सचेंज है, बल्कि यह भी है कि बदलते नियमों के बीच उसका कारोबार कितना स्थिर और विविध रह सकता है।
इस IPO को भारत के पूंजी बाजार के लिए भी एक महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है, क्योंकि देश का सबसे बड़ा शेयर बाजार संचालक अब खुद सार्वजनिक बाजार में सूचीबद्ध होने जा रहा है।