वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को फिर तेज उछाल आया। रॉयटर्स के मुताबिक ब्रेंट कच्चा तेल लगभग 3 प्रतिशत बढ़कर 107 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा, जबकि डब्ल्यूटीआई लगभग 103 डॉलर के आसपास रहा।
ताजा तेजी की वजह सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन पर ड्रोन हमला, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों से जुड़ी घटनाएं और लाल सागर मार्ग पर बढ़ती सुरक्षा चिंता है।
सऊदी पाइपलाइन इतनी महत्वपूर्ण क्यों है
करीब 1,200 किलोमीटर लंबी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन सऊदी कच्चे तेल को लाल सागर तट तक पहुंचाती है। यह होर्मुज जलडमरूमध्य को दरकिनार करने का प्रमुख विकल्प है।
पाइपलाइन अस्थायी रूप से बंद होने से वैकल्पिक निर्यात क्षमता पर दबाव बढ़ा है। बाजार में चिंता है कि लंबे व्यवधान की स्थिति में उपलब्ध भंडारण और निर्यात विकल्प सीमित हो सकते हैं।
भारत पर सीधा असर
भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है। लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें रुपये, महंगाई, ईंधन लागत, चालू खाते और कंपनियों के मुनाफे पर एक साथ असर डाल सकती हैं।
बाजार केवल वास्तविक आपूर्ति में कमी का मूल्य नहीं लगा रहा, बल्कि भू-राजनीतिक जोखिम भी कीमतों में जोड़ रहा है। इसलिए आगे की दिशा कूटनीतिक तनाव में कमी और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर भी निर्भर करेगी।