जनजातीय कार्य मंत्रालय ने 15 अक्टूबर को Tribal Languages Working Group की पहली बैठक आयोजित की। इसमें Central Institute of Indian Languages, IIT, विश्वविद्यालयों और भाषा संरक्षण संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। समूह जनजातीय भाषाओं के दस्तावेजीकरण, digital preservation और promotion के लिए रोडमैप तैयार कर रहा है।
मंत्रालय Adi Vaani को राष्ट्रीय जनजातीय भाषा repository के रूप में विकसित कर रहा है। Digital archiving शब्दावली, मौखिक परंपरा और भाषा संसाधनों को सुरक्षित कर सकता है, लेकिन प्रभावी संरक्षण के लिए समुदाय का स्वामित्व, पीढ़ियों के बीच भाषा का उपयोग, शिक्षा और संवेदनशील सांस्कृतिक ज्ञान की सुरक्षा भी आवश्यक है।
सिविल सेवा के लिए भाषा संरक्षण सांस्कृतिक अधिकार, जनजातीय नीति, शिक्षा, technology और intangible heritage से जुड़ता है। Repository उपयोगी अवसंरचना है, लेकिन समुदायों में भाषा के जीवित उपयोग का विकल्प नहीं है।