चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन चरण में ‘वृहद ब्रिक्स’ सहयोग को अधिक व्यावहारिक आर्थिक ढांचे में बदलने का प्रस्ताव रखा। उनका जोर राजनीति और सुरक्षा के साथ व्यापार, वित्त, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आपूर्ति शृंखलाओं पर था।
चीन का तर्क है कि विस्तारित ब्रिक्स को केवल कूटनीतिक समूह न रहकर आर्थिक सहयोग का अधिक जुड़ा हुआ मंच बनना चाहिए।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता मुक्त-स्रोत क्षेत्र का प्रस्ताव
शी ने चीन के नेतृत्व में ब्रिक्स कृत्रिम बुद्धिमत्ता मुक्त-स्रोत क्षेत्र बनाने की बात कही। प्रस्तावित व्यवस्था बड़े भाषा मॉडल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रशिक्षण, मुक्त-स्रोत प्रणालियों और सदस्य देशों के बीच तकनीकी सहयोग पर काम कर सकती है।
चीन ने 2027 में ब्रिक्स सेवा व्यापार मंच और विशेष आर्थिक क्षेत्र साझेदारी पहल आयोजित करने का भी प्रस्ताव रखा।
आपूर्ति शृंखलाओं की स्थिरता पर ध्यान
शी ने औद्योगिक और आपूर्ति शृंखलाओं की स्थिरता को रणनीतिक प्राथमिकता बताया। पश्चिम एशिया के संघर्ष, शुल्क बाधाओं और तकनीकी प्रतिबंधों ने वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को अधिक खंडित किया है।
यह पहल अभी क्रियान्वयन के शुरुआती चरण में है। सदस्य देशों को डेटा नियम, साइबर सुरक्षा, बौद्धिक संपदा और बाजार पहुंच जैसे विषयों पर अलग-अलग सहमतियां बनानी होंगी। इसे अभी एक साझा ‘ब्रिक्स कृत्रिम बुद्धिमत्ता बाजार’ कहना सही नहीं होगा।