गोल्डमैन सैक्स और जेपी मॉर्गन ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सितंबर बैठक को लेकर अपने अनुमान बदल दिए हैं। रॉयटर्स के मुताबिक दोनों अब 0.25 प्रतिशत अंक की ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं।
इस बदलाव के पीछे अगस्त की अपेक्षा से अधिक महंगाई और पश्चिम एशिया के संघर्ष से 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचे तेल की कीमतें हैं।
बाजार की उम्मीद कितनी बदली
सीएमई के आंकड़ों के अनुसार कारोबारी सितंबर में दर बढ़ने की संभावना लगभग 87 प्रतिशत के आसपास देख रहे हैं। महंगाई के ताजा आंकड़े आने से पहले यह संभावना करीब 70 प्रतिशत थी।
जेपी मॉर्गन दिसंबर में एक और बढ़ोतरी की संभावना भी देख रहा है। अमेरिकी नीति दर का मौजूदा दायरा 3.5 से 3.75 प्रतिशत है।
भारत पर असर
अमेरिका में ऊंची दरें डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल को मजबूत कर सकती हैं। इससे उभरते बाजारों से पूंजी प्रवाह कमजोर हो सकता है और रुपये तथा भारतीय बॉन्ड प्रतिफल पर दबाव बढ़ सकता है।
तेल और वैश्विक ब्याज दरों का एक साथ बढ़ना भारत के लिए कठिन स्थिति है, क्योंकि इससे आयातित महंगाई और बाहरी वित्तीय परिस्थितियां दोनों सख्त हो सकती हैं।