होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही और कम हो गई है। Kpler के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार सोमवार को केवल चार commodity vessels ने इस जलमार्ग को पार किया, जबकि रविवार को यह संख्या 10 थी।
युद्ध से पहले स्थिति क्या थी
28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने से पहले होर्मुज से रोज लगभग 125 बड़े commercial vessels गुजरते थे। यह मार्ग वैश्विक crude oil और LNG supply का करीब पांचवां हिस्सा संभालता था।
जोखिम क्यों बढ़ा
ईरान ने बिना अनुमति गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी दी है। इसी बीच एक tanker के नुकसान, Saudi pipeline पर हमले और Gulf-Iran talks टलने से shipping companies और insurers की चिंता बढ़ी है।
भारत के लिए असर
भारत बड़े पैमाने पर तेल और गैस आयात करता है। मार्ग लंबे समय तक बाधित रहा तो crude price, freight, insurance, rupee और inflation - सभी पर दबाव बढ़ सकता है।

