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BRICS का New Delhi Declaration: West Asia पर ‘maximum restraint’, unilateral tariffs पर भी चिंता

नई दिल्ली में BRICS नेताओं ने साझा घोषणा अपनाई। West Asia में तनाव कम करने, नागरिक ढांचे की सुरक्षा और unilateral tariff/non-tariff measures से global trade को बचाने पर जोर दिया गया।

BRICS member और partner देशों का मानचित्र - प्रतिनिधि visual

नई दिल्ली में 18वें BRICS Summit के दौरान सदस्य देशों ने New Delhi Declaration को सर्वसम्मति से अपनाया। घोषणा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा West Asia में बढ़ते तनाव को लेकर आया, जहां समूह ने सभी पक्षों से “maximum restraint” बरतने और विवादों को dialogue, consultation और diplomacy के जरिए सुलझाने की अपील की।

BRICS में इस समय Iran और UAE दोनों सदस्य हैं, जबकि Russia और China की geopolitical positions भी पश्चिमी देशों से अलग हैं। ऐसे में Middle East पर साझा भाषा तय होना आसान नहीं था। Declaration ने civilians, civilian infrastructure और nuclear safety की सुरक्षा पर भी जोर दिया।

Trade पर भी साफ संदेश

घोषणा ने unilateral tariff और non-tariff measures पर चिंता जताई। BRICS देशों का तर्क है कि ऐसी नीतियां global trade flows को distort कर सकती हैं और developing economies पर disproportionate असर डाल सकती हैं। बयान में UN Security Council की मंजूरी के बिना लगाए गए unilateral sanctions के खिलाफ भी समूह की पुरानी आपत्ति दोहराई गई।

Summit की timing भी महत्वपूर्ण है। West Asia conflict ने oil, shipping और insurance costs बढ़ा दिए हैं, जबकि global trade पहले से protectionism और tariff disputes से दबाव में है। इसलिए BRICS ने security और economy को अलग-अलग मुद्दों की तरह नहीं, बल्कि एक दूसरे से जुड़े जोखिम के रूप में पेश किया।

भारत के लिए इसका अर्थ

भारत के लिए यह declaration diplomatic balancing का उदाहरण है। New Delhi के अमेरिका और Europe से मजबूत संबंध हैं, लेकिन Russia, Iran और Global South के साथ strategic partnerships भी महत्वपूर्ण हैं। BRICS मंच पर consensus बनाते हुए भारत को इन सभी संबंधों के बीच संतुलन रखना पड़ता है।

Declaration किसी conflict का समाधान नहीं है और न ही यह legally binding document है। इसका महत्व इस बात में है कि बड़े emerging economies किन मुद्दों पर साझा राजनीतिक भाषा बनाने में सफल हुए और आगे trade, payments, energy और multilateral reform पर cooperation किस दिशा में जाता है।