अंतरराष्ट्रीय संबंध और भू-राजनीति
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: परीक्षा के लिए क्या समझना जरूरी है
नई दिल्ली घोषणा, पश्चिम एशिया, स्थानीय मुद्रा में व्यापार, वैश्विक संस्थागत सुधार और भारत की कूटनीतिक भूमिका - एक साथ समझिए।
THE INDIQA HINDI सिविल सेवा डेस्क
प्रकाशित: 14 सित॰ 2026
अपडेट: 14 सित॰ 2026
6 मिनट का पाठ
नई दिल्ली में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ऐसे समय हुआ जब पश्चिम एशिया में तनाव, तेल की बढ़ती कीमतें, व्यापारिक संरक्षणवाद और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग एक साथ तेज हैं। इसलिए इस सम्मेलन को केवल नेताओं की बैठक की तरह नहीं, बल्कि बदलती विश्व-व्यवस्था के संकेत के रूप में देखना चाहिए।
ब्रिक्स क्या है
ब्रिक्स की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के समूह के रूप में हुई थी। विस्तार के बाद इसमें कई नए सदस्य और साझेदार देश जुड़े हैं। इसका मुख्य उद्देश्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज को वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक संस्थाओं में मजबूत करना है।
नई दिल्ली घोषणा के मुख्य बिंदु
घोषणा में पश्चिम एशिया में संयम, वार्ता और कूटनीति पर जोर दिया गया। एकतरफा शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं पर चिंता जताई गई तथा स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सीमा-पार भुगतान व्यवस्था को बढ़ाने की बात की गई।
संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की मांग भी दोहराई गई।
भारत के लिए महत्व
भारत के लिए ब्रिक्स एक ऐसी व्यवस्था है जहां वह अमेरिका और यूरोप से अपने संबंध बनाए रखते हुए रूस, चीन, ईरान और वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ भी संवाद कर सकता है। यही भारत की बहु-संरेखीय विदेश नीति का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
परीक्षा में क्या पूछा जा सकता है
मुख्य परीक्षा में ब्रिक्स की उपयोगिता, वैश्विक दक्षिण की भूमिका, स्थानीय मुद्रा व्यापार, संयुक्त राष्ट्र सुधार और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर प्रश्न बन सकता है। प्रारंभिक परीक्षा के लिए सदस्य देशों, अध्यक्षता और प्रमुख संस्थागत पहलों को याद रखना उपयोगी है।
सिविल सेवा अध्ययन दृष्टि
इस मुद्दे को परीक्षा की दृष्टि से समझें
सामान्य अध्ययन 2
अंतरराष्ट्रीय संबंध - ब्रिक्स, वैश्विक दक्षिण और बहुपक्षीय संस्थाएं
प्रारंभिक परीक्षा: High
मुख्य परीक्षा: High
संक्षिप्त सार
ब्रिक्स अब उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बड़े मंच के रूप में व्यापार, भुगतान, वैश्विक शासन और रणनीतिक सहयोग पर अधिक सक्रिय भूमिका चाहता है। भारत के लिए इसका महत्व रणनीतिक स्वायत्तता, वैश्विक दक्षिण और बहुपक्षीय सुधार से जुड़ा है।
खबर में क्यों
नई दिल्ली में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन हुआ, जिसमें पश्चिम एशिया, स्थानीय मुद्रा में व्यापार, भुगतान व्यवस्था और वैश्विक संस्थागत सुधार पर साझा घोषणा अपनाई गई।
प्रारंभिक परीक्षा के मुख्य तथ्य
- ब्रिक्स का मूल समूह ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से बना था।
- नई दिल्ली घोषणा legally binding treaty नहीं, बल्कि राजनीतिक सहमति का दस्तावेज है।
- स्थानीय मुद्रा में व्यापार का अर्थ एक साझा ब्रिक्स मुद्रा की घोषणा नहीं है।
मुख्य शब्द
- BRICS
- Global South
- multilateralism
- local currency trade
- UN reform
मुख्य परीक्षा के आयाम, चुनौतियां और नीतिगत पक्ष
- वैश्विक दक्षिण की बढ़ती संस्थागत भूमिका
- भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और बहु-संरेखीय विदेश नीति
- संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में सुधार
- स्थानीय मुद्रा व्यापार और भुगतान तंत्र की व्यवहारिक सीमाएं
भारत के लिए महत्व
भारत ब्रिक्स का उपयोग पश्चिमी देशों से संबंध बनाए रखते हुए रूस, चीन, ईरान और अन्य वैश्विक दक्षिण देशों के साथ संवाद और संस्थागत सुधार की मांग को आगे बढ़ाने के लिए करता है।
ध्यान रखने योग्य बात
स्थानीय मुद्रा में व्यापार और ‘एक साझा ब्रिक्स मुद्रा’ को एक ही बात न समझें।
संभावित अभ्यास प्रश्न
ब्रिक्स के विस्तार और नई आर्थिक पहलों के संदर्भ में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक दक्षिण में उसकी भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
त्वरित पुनरावृत्ति
- ब्रिक्स का मूल समूह ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से बना था।
- नई दिल्ली घोषणा legally binding treaty नहीं, बल्कि राजनीतिक सहमति का दस्तावेज है।
- स्थानीय मुद्रा में व्यापार का अर्थ एक साझा ब्रिक्स मुद्रा की घोषणा नहीं है।
- वैश्विक दक्षिण की बढ़ती संस्थागत भूमिका
- भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और बहु-संरेखीय विदेश नीति
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