नई दिल्ली में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ऐसे समय हुआ जब पश्चिम एशिया में तनाव, तेल की बढ़ती कीमतें, व्यापारिक संरक्षणवाद और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग एक साथ तेज हैं। इसलिए इस सम्मेलन को केवल नेताओं की बैठक की तरह नहीं, बल्कि बदलती विश्व-व्यवस्था के संकेत के रूप में देखना चाहिए।
ब्रिक्स क्या है
ब्रिक्स की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के समूह के रूप में हुई थी। विस्तार के बाद इसमें कई नए सदस्य और साझेदार देश जुड़े हैं। इसका मुख्य उद्देश्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज को वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक संस्थाओं में मजबूत करना है।
नई दिल्ली घोषणा के मुख्य बिंदु
घोषणा में पश्चिम एशिया में संयम, वार्ता और कूटनीति पर जोर दिया गया। एकतरफा शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं पर चिंता जताई गई तथा स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सीमा-पार भुगतान व्यवस्था को बढ़ाने की बात की गई।
संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की मांग भी दोहराई गई।
भारत के लिए महत्व
भारत के लिए ब्रिक्स एक ऐसी व्यवस्था है जहां वह अमेरिका और यूरोप से अपने संबंध बनाए रखते हुए रूस, चीन, ईरान और वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ भी संवाद कर सकता है। यही भारत की बहु-संरेखीय विदेश नीति का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
परीक्षा में क्या पूछा जा सकता है
मुख्य परीक्षा में ब्रिक्स की उपयोगिता, वैश्विक दक्षिण की भूमिका, स्थानीय मुद्रा व्यापार, संयुक्त राष्ट्र सुधार और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर प्रश्न बन सकता है। प्रारंभिक परीक्षा के लिए सदस्य देशों, अध्यक्षता और प्रमुख संस्थागत पहलों को याद रखना उपयोगी है।


