भारत और चीन के संबंध एशिया की शक्ति-संतुलन व्यवस्था पर सीधा प्रभाव डालते हैं। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक ने संवाद बढ़ने का संकेत दिया, लेकिन दोनों देशों के बीच मूल विवाद समाप्त नहीं हुए हैं।
2020 के बाद क्या बदला
गलवान घाटी की झड़प के बाद दोनों देशों के बीच राजनीतिक विश्वास तेजी से घटा। पूर्वी लद्दाख में सैन्य तैनाती बढ़ी, निवेश और वीजा पर प्रतिबंध कड़े हुए और आर्थिक संबंधों पर सुरक्षा का प्रभाव बढ़ गया।
बाद के वर्षों में कुछ क्षेत्रों में सैनिकों की वापसी और संवाद से तनाव कम हुआ, लेकिन सीमा प्रश्न अभी भी समाधान से दूर है।
वास्तविक नियंत्रण रेखा क्यों महत्वपूर्ण है
भारत ने स्पष्ट किया है कि सीमा पर शांति के बिना व्यापक द्विपक्षीय संबंध सामान्य नहीं हो सकते। इसका अर्थ है कि व्यापार और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की इच्छा के बावजूद सुरक्षा प्राथमिकता बनी रहेगी।
आर्थिक विरोधाभास
भारत चीन से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक सामान, मशीनरी, रसायन और औद्योगिक सामग्री आयात करता है। इस कारण व्यापार घाटा बहुत बड़ा है। दूसरी ओर भारत संवेदनशील क्षेत्रों में चीनी निवेश की सुरक्षा जांच भी करता है।
परीक्षा में उपयोग
यह विषय भारत की पड़ोसी नीति, रणनीतिक स्वायत्तता, सीमा प्रबंधन, व्यापार निर्भरता और हिंद-प्रशांत राजनीति से जुड़ता है। उत्तर में केवल सीमा विवाद नहीं, बल्कि सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के बीच संबंध भी समझाना चाहिए।


