केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹10,000 करोड़ की Container Manufacturing Promotion Scheme को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंटेनर विनिर्माण पारिस्थितिकी बनाना और आयातित कंटेनरों पर निर्भरता घटाना है। कार्यक्रम की घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में हुई थी और यह FY 2039-40 तक चलेगा।
योजना नई विनिर्माण इकाइयों और मौजूदा इकाइयों के विस्तार दोनों को समर्थन देगी। एक घटक पात्र पूंजी निवेश के टर्म लोन पर सालाना 3% ब्याज सहायता देता है। सरकार का व्यापक लक्ष्य वार्षिक घरेलू कंटेनर निर्माण क्षमता को लगभग 70,000 TEU से बढ़ाकर कार्यक्रम अवधि में करीब 7.5 लाख TEU करना है।
आर्थिक तर्क केवल स्टील के डिब्बे बनाने तक सीमित नहीं है। कंटेनर बंदरगाह, रेल माल ढुलाई, शिपिंग और निर्यात लॉजिस्टिक्स का महत्वपूर्ण इनपुट हैं। घरेलू कमी निर्यातकों को वैश्विक उपकरण असंतुलन, मालभाड़ा व्यवधान और ऊंची पुनर्स्थापन लागत के प्रति संवेदनशील बना सकती है। इसलिए घरेलू क्षमता निर्माण औद्योगिक नीति के साथ आपूर्ति-शृंखला लचीलेपन का भी उपाय है।
क्रियान्वयन बड़ी चुनौती है। ऊंचे क्षमता लक्ष्य के लिए स्थिर मांग, प्रतिस्पर्धी इस्पात व घटक लागत, मानकीकरण, मरम्मत नेटवर्क और शिपिंग लाइनों, बंदरगाहों तथा बहु-माध्यम लॉजिस्टिक्स से एकीकरण जरूरी होगा। भारत को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि प्रोत्साहन ऐसी महंगी निष्क्रिय क्षमता न बनाएं जो स्थापित एशियाई विनिर्माण केंद्रों से प्रतिस्पर्धा न कर सके।
सिविल सेवा और आर्थिक नीति के लिए यह योजना Make in India, समुद्री लॉजिस्टिक्स, अवसंरचना, औद्योगिक प्रोत्साहन और निर्यात प्रतिस्पर्धा के संगम पर है। सफलता का आकलन लागत, क्षमता उपयोग, निजी निवेश और भारतीय निर्यातकों की बाहरी कंटेनर कमी के प्रति संवेदनशीलता में कमी से होना चाहिए।