प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बातचीत की। शी का यह 2019 के बाद पहला भारत दौरा था। दोनों पक्षों ने लंबे तनाव के बाद संबंधों को स्थिर करने की इच्छा जताई।
2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद भारत-चीन संबंध तेजी से बिगड़े थे। पूर्वी लद्दाख में सैन्य तैनाती, निवेश संबंधी पाबंदियां, वीजा मुद्दे और राजनीतिक अविश्वास ने द्विपक्षीय रिश्तों को प्रभावित किया।
सीमा पर शांति को भारत ने जरूरी बताया
मोदी ने कहा कि विवादित सीमा पर शांति और स्थिरता व्यापक द्विपक्षीय संबंधों के लिए आवश्यक है। भारत ने मौजूदा समझौतों और पारस्परिक सम्मान, संवेदनशीलता और हितों के सिद्धांत पर जोर दिया।
शी जिनपिंग ने भी रिश्तों को दीर्घकालीन रणनीतिक दृष्टि से देखने और सहयोग बढ़ाने की बात कही।
व्यापार असंतुलन अभी भी बड़ी चुनौती
दोनों नेताओं ने बाजार तक पहुंच, कारोबारी संपर्क और लोगों के बीच आवाजाही बढ़ाने पर चर्चा की। भारत का चीन के साथ वस्तु व्यापार घाटा अभी भी बहुत बड़ा है। संवेदनशील क्षेत्रों में चीनी निवेश और तकनीकी पहुंच पर सुरक्षा जांच भी जारी है।
यह बैठक संबंधों में सुधार का संकेत देती है, लेकिन इसे पूर्ण सामान्यीकरण मानना जल्दबाजी होगी। सीमा पर सैन्य तैनाती, अरुणाचल प्रदेश, क्षेत्रीय रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक निर्भरता जैसे मुद्दे अभी भी समाधान से दूर हैं।