एशियाई शेयर बाजारों पर सोमवार को व्यापक दबाव रहा। रॉयटर्स के मुताबिक जापान का निक्केई करीब 1 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3 प्रतिशत से अधिक तक गिरा।
दो अलग झटके एक साथ काम कर रहे हैं। पश्चिम एशिया में आपूर्ति जोखिम से तेल महंगा हुआ है, जबकि अग्रणी कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंपनियों के प्रमुखों की सुरक्षा संबंधी चेतावनियों ने तकनीकी शेयरों में बिकवाली बढ़ाई।
ब्याज दरों का तीसरा दबाव
अमेरिका में मजबूत महंगाई आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व से दर बढ़ने की संभावना तेज हुई है। ऊंचे अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल खासकर महंगे मूल्यांकन वाले तकनीकी और विकास-केंद्रित शेयरों के लिए दबाव बनते हैं।
बैंक ऑफ जापान भी मौद्रिक सख्ती की दिशा में कदम उठा सकता है।
भारत के लिए क्या देखना जरूरी है
वैश्विक जोखिम से बचने की प्रवृत्ति विदेशी पोर्टफोलियो निवेश को प्रभावित कर सकती है। अगर तेल और वैश्विक ब्याज दरें दोनों ऊंची रहीं, तो भारतीय शेयर बाजार, रुपये और बॉन्ड पर एक साथ दबाव पड़ सकता है।
घरेलू आर्थिक कारक महत्वपूर्ण रहेंगे, लेकिन निकट अवधि में बाजार की दिशा वैश्विक ऊर्जा और मौद्रिक घटनाक्रम से काफी प्रभावित हो सकती है।




