यूरोपीय केंद्रीय बैंक के नीति-निर्माता मार्टिन्स कजाक्स ने कहा है कि यूरो क्षेत्र में महंगाई का जोखिम बढ़ने पर ब्याज दरों को आगे भी धीरे-धीरे बढ़ाना पड़ सकता है।
यूरोपीय केंद्रीय बैंक ने पिछले सप्ताह प्रमुख दर 2.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 2.5 प्रतिशत की थी। पश्चिम एशिया के संघर्ष से ईंधन की लागत और आपूर्ति जोखिम बढ़ने के कारण मौद्रिक नीति की चुनौती कठिन हुई है।
महंगाई की स्थिति
यूरो क्षेत्र की महंगाई अगस्त में लगभग 3.3 प्रतिशत रही। कजाक्स की चिंता है कि लंबे समय तक ऊंची ऊर्जा कीमतें मजदूरी और अन्य वस्तुओं तथा सेवाओं की कीमतों में फैल सकती हैं।
उन्होंने 2.5 प्रतिशत को नीति दर की ऊपरी सीमा मानने से इनकार किया और आगे सख्ती की संभावना खुली रखी।
भारत के लिए क्या महत्व है
यूरोपीय केंद्रीय बैंक की सख्ती वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल और निवेशकों की जोखिम लेने की इच्छा को प्रभावित कर सकती है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान भी इसी सप्ताह नीतिगत फैसले लेने वाले हैं।
यदि प्रमुख केंद्रीय बैंक एक साथ सख्त रुख अपनाते हैं, तो उभरते बाजारों के लिए वित्तीय परिस्थितियां कठिन हो सकती हैं। तेल आयातक भारत के लिए यह वैश्विक पूंजी और ऊर्जा महंगाई का दोहरा दबाव बन सकता है।




