अमेरिकी डॉलर सोमवार को मजबूत रहा, जबकि जापानी येन हाल की तेजी के बाद सात महीने के उच्च स्तर के करीब बना रहा। निवेशक इस सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति बैठकों पर नजर रख रहे हैं।
अमेरिका में अगस्त की महंगाई और 100 डॉलर से ऊपर तेल की कीमतों ने प्रमुख केंद्रीय बैंकों के लिए नीतिगत रास्ता कठिन बना दिया है।
फेड और बैंक ऑफ जापान से क्या उम्मीद है
बाजार अमेरिकी फेडरल रिजर्व से 0.25 प्रतिशत अंक की दर बढ़ोतरी की ऊंची संभावना देख रहा है। बैंक ऑफ जापान के लिए भी एक चौथाई प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की संभावना बढ़ी है।
यूरोपीय केंद्रीय बैंक पिछले सप्ताह दर बढ़ा चुका है, जबकि बैंक ऑफ इंग्लैंड के दर स्थिर रखने की संभावना अधिक मानी जा रही है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण
मजबूत डॉलर और ऊंचे अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव डाल सकते हैं। जापान में ब्याज दर बदलने से वैश्विक पूंजी प्रवाह और तथाकथित ‘कैरी ट्रेड’ भी प्रभावित हो सकते हैं।
भारत के लिए चुनौती इसलिए अधिक है क्योंकि तेल की कीमतें भी ऊंची हैं। महंगा तेल और मजबूत डॉलर एक साथ रुपये तथा महंगाई पर दबाव बढ़ा सकते हैं।




