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हिमालयी हिमनदों का संकट: 200 उच्च-जोखिम झीलें भारत के लिए क्यों चिंता हैं

तेजी से पिघलते हिमनद जल, कृषि, जलविद्युत और आपदा प्रबंधन - चारों पर असर डाल सकते हैं।

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हिंदूकुश-हिमालय क्षेत्र एशिया की प्रमुख नदी प्रणालियों का जल स्रोत है। नई रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि हिमनद तेजी से द्रव्यमान खो रहे हैं और कई हिमनदीय झीलें अस्थिर होती जा रही हैं।

भारत में लगभग 200 हिमनदीय झीलों को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है और इनमें से दर्जनों को अत्यधिक जोखिम वाला माना गया है।

हिमनदीय झील कैसे बनती है

हिमनद पीछे हटते हैं तो उसके सामने पानी जमा होकर झील बना सकता है। कई बार यह झील ढीली चट्टानों और बर्फ से बने प्राकृतिक अवरोध के पीछे रहती है।

यदि यह अवरोध अचानक टूट जाए तो नीचे के क्षेत्रों में तेज बाढ़ आ सकती है। इसे हिमनदीय झील विस्फोट बाढ़ कहा जाता है।

‘पीक वाटर’ क्या है

शुरुआती चरण में हिमनद तेजी से पिघलते हैं तो नदी में जल प्रवाह बढ़ सकता है। लेकिन एक बिंदु के बाद बर्फ का भंडार कम होने से दीर्घकालीन प्रवाह घटने लगता है। इसी अवस्था को ‘पीक वाटर’ कहा जाता है।

भारत पर प्रभाव

हिमालयी नदियां सिंचाई, पेयजल, जलविद्युत और पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसलिए हिमनदों का क्षय केवल पर्यावरण का प्रश्न नहीं, बल्कि जल सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा का भी विषय है।

परीक्षा बिंदु

प्रारंभिक परीक्षा में हिमनदीय झील, हिमनद, नदी बेसिन और आपदा संबंधी शब्दावली पूछी जा सकती है। मुख्य परीक्षा में जलवायु परिवर्तन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और हिमालयी पारिस्थितिकी को जोड़कर उत्तर लिखना उपयोगी होगा।

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