केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए ₹53,428 करोड़ के कुल परिव्यय को मंजूरी दी है। कार्यक्रम का नाम बदलकर प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना किया गया है। इसका मूल उद्देश्य पात्र वृद्धजन, विधवाओं, दिव्यांग व्यक्तियों और निर्धन परिवारों को सामाजिक सहायता देना बना रहेगा।
दिव्यांगजन पेंशन में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। पात्रता के लिए बेंचमार्क दिव्यांगता का मानदंड दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप 80% से घटाकर 40% किया जा रहा है, जिससे संभावित लाभार्थी दायरा बढ़ सकता है। इसे मौजूदा सामाजिक सहायता ढांचे में संशोधन के रूप में समझना चाहिए, न कि नई अंशदायी बीमा योजना के रूप में।
सिविल सेवा परीक्षा के लिए यह विषय नीति-निर्देशक तत्वों, सामाजिक सुरक्षा और केंद्र-राज्य क्रियान्वयन से जुड़ता है। अनुच्छेद 41 राज्य को अपनी आर्थिक क्षमता के भीतर वृद्धावस्था, बीमारी और दिव्यांगता जैसी स्थितियों में सार्वजनिक सहायता की व्यवस्था करने की दिशा देता है। मुख्य प्रशासनिक प्रश्न लाभ की पर्याप्तता, सही लाभार्थी पहचान, वित्तीय साझेदारी और अंतिम छोर तक वितरण का है।