भारतीय रिजर्व बैंक ने टाटा संस के मुख्य निवेश कंपनी के रूप में पंजीकरण समाप्त करने के अनुरोध को ठुकरा दिया है। रॉयटर्स ने दो सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।
यह फैसला टाटा समूह की पुरानी होल्डिंग कंपनी पर संभावित शेयर बाजार सूचीबद्धता का दबाव बढ़ाता है।
सूचीबद्धता का नियम क्या है
आरबीआई के नियमों के तहत कुछ बड़े गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान और मुख्य निवेश कंपनियां, खासकर बड़ी परिसंपत्ति और सार्वजनिक धन तक पहुंच वाले संस्थान, सूचीबद्धता संबंधी आवश्यकताओं के दायरे में आ सकते हैं।
रॉयटर्स के मुताबिक मार्च 2025 तक टाटा संस की अलग परिसंपत्तियां करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये थीं।
टाटा संस निजी क्यों रहना चाहता है
टाटा संस टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और एयर इंडिया सहित कई समूह कंपनियों पर नियंत्रण रखता है। टाटा ट्रस्ट्स के पास इसकी लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
शापूरजी पल्लोनजी समूह जैसे शेयरधारक लंबे समय से सूचीबद्धता के पक्ष में दबाव बनाते रहे हैं। आरबीआई के फैसले के बाद भी सूचीबद्धता की तारीख अपने-आप तय नहीं हो जाती; कानूनी, नियामकीय और शेयरधारक संबंधी कई चरण बाकी हैं।



